ऊँचा उड़कर इतना ना इतराओ परिंदो, अगर हम अपनी औकात पर आ गए तो आसमान खरीद लेंगे…

डूब जाए आसानी से, मैं वो कश्ती नहीं,
मिटा सको तुम मुझे, ये बात तुम्हारे बस की नहीं।

मेरी शराफत को तुम बुझदिली का नाम मत दो, क्यूंकि दबे ना जब तक घोड़ा, ️तब तक बन्दूक भी खिलौना ही होती है।

फर्क नहीं पड़ता मुझे कि दुनिया क्या कहती है,
मैं अच्छा हूँ बहुत ये मेरी माँ कहती है।

सिर्फ उमर ही छोटी है, जजबा तो दुनिया को मुठ्ठी में करने का रखते है

सही वक्त पर करवा देंगे हदों का अहसास, कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं...

जहाँ सच ना चले वहां झूठ ही सही।
जहाँ हक ना चले वहां लूट ही सही।

रेगिस्तान भी हरे हो जाते है, जब अपने साथ अपने दोस्त खड़े हो जाते है…