‘सदैव’ का सन्धि विच्छेद क्या है ? Sadaiv ka Sandhi Vichchhed – HR

आज की इस एक ओर सन्धि विच्छेद से सम्बन्धित पोस्ट मे हम सदैव का सन्धि विच्छेद जानेंगे |

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सदैव शब्द का सन्धि-विच्छेद

जैसा की आप जानते हैं की सदैव शब्द दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है | यदि आप ‘सदैव’ शब्द का सन्धि-विच्छेद करना चाहते हो तो, आपको कुछ नियमों (आपको नियम पता होने चाहिये) का पालन करना होगा | 

आपने अगर थोड़ा बहुत सन्धि के बारे में पढ़ा होगा तो आपको पता होगा की जब ‘अ’ या ‘आ’ के साथ ‘ए’ मिल जाये तो “ऐ” बन जाता है,  [‘आ’ + ‘ए’ = “ऐ”] 

और ‘दा’ में ‘आ’ का स्वर है, उसमें ‘ए’ का स्वर मिलने से “ऐ” स्वर बन जाता है। 

इसलिये सदैव का सन्धि विच्छेद होगा — सदैव = सदा + एव 

तो अब आपको पता चल गया होगा की इसका सन्धि विच्छेद क्या होगा | 

Note – “सदैव” शब्द ‘वृद्धि संधि’ का ही एक उदाहरण है | 

 वृद्धि सन्धि को कैसे पहचाने ? 

जब ‘अ’ या ‘आ’ के साथ ‘ए’ हो तब ‘ऐ’ बन जाता है | [‘अ’ या ‘आ’ + ‘ए’ = “ऐ”] इसी प्रकार जब भी ‘अ’ या ‘आ’ के साथ ‘ओ’ हो, तब “औ” बन जाता है | ऐसी स्थिति में वृधि संधि होती है |[‘अ’ या ‘आ’ + ‘ओ’ = “औ”] 

 वृद्धि सन्धि के अन्य उदाहरण सन्धि विच्छेद के साथ –

शब्दसन्धि-विच्छेद
अद्यैवअद्य + एव
तथैवतथा + एव
देवैश्‍वर्यम्देव + ऐश्‍वर्यम्
विद्यैश्‍वर्यम्विद्या + ऐश्‍वर्यम्
तण्‍डुलौदनम्तण्‍डुल + ओदनम्
महौषधिमहा + औषधि:

तो दोस्तों अब आप समझ गये होंगे, अगर आपका इससे सम्बन्धित कोई सुझाव या सवाल हो तो, हमें कमेन्ट में जरूर बतायें |

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