प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का जीवन परिचय (Board Exam – 2021) – Hindi Raja

दोस्तों अगर आप भी Board परीक्षा की तैयारी के लिए प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का जीवन परिचय याद करना चाहते हैं । तो आप सही आर्टिकल पढ़ रहे हैं । 
आपको भी पता होगा कि बोर्ड परीक्षा में जीवन परिचय 5-6 नम्बर का आता है, जिसमें आपको जीवन परिचय और साहित्यिक परिचय दोनों लिखने होते हैं । अगर आप उसे नहीं करते तो आपके अंक कम हो सकते हैं।
इस पोस्ट में हम आपको एक ट्रिक भी बताएंगे जिससे आप बिना याद किये भी साहित्य परिचय आसानी से लिख सकते हैं । अगर आप इस तरह से अपनी बोर्ड परीक्षा में लिखकर आते हो तो आपको अच्छे अंक प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाएगी । 
इसलिये पोस्ट को पूरा पढ़िये और अंत में हमने जो ट्रिक बतायी है उसका भी सही इस्तेमाल कीजिये । इस पोस्ट के अंत में आप संंक्षिप्त जीवन परिचय भी पढ़ सकते हैं । जिससे आपको याद करने के बाद अभ्यास करने में सुविधा होगी ।

प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का विस्तृत जीवन परिचय —

प्रोफेसर रेड्डी का जन्म सन् 1919 ई० में आन्ध्र प्रदेश में हुआ था। ये श्रेष्ठ विचारक, समालोचक एवं निबंधकार हैं। इनका व्यक्तित्व और कृतित्व अत्यन्त प्रभावशाली है। कई वर्षों तक ये आन्ध्र विश्व-विद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे हैं |

ये वहाँ के स्नातकोत्तर अध्ययन एवं अनुसंधान विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर भी रहे हैं। इनके निर्देशन में हिन्दी और तेलुगु साहित्य के विविध प्रश्नों के तुलनात्मक अध्ययन पर शोध कार्य भी हुआ है |
इनका (मृत्यु) निधन सन् 2005 ई. को हो गया |

प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का साहित्यिक परिचय —

श्री रेड्डी की हिन्दी साहित्य-सेवा, साधना एवं निष्ठा सराहनीय है। तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम के साहित्य और इतिहास का सूक्ष्म विवेचन करने के साथ-साथ हिन्दी भाषा और साहित्य से भी उनकी तुलना करने में ये पर्याप्त रुचि लेते रहे हैं।
अब तक रेड्डी जी के आठ ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं | इनकी रचनाएँ (कृतियाँ) —
  1. साहित्य और समाज
  2. मेरे विचार
  3. हिन्दी और तेलुगु : एक तुलनात्मक अध्ययन 
  4. दक्षिण की भाषाएँ और उनका साहित्य
  5. वैचारिकी, शोध और बोध
  6. वेलुगु दारुल ( तेलुगु)
  7. लांग्वेज प्रोबलम इन इंडिया (संपादित अंग्रेजी ग्रंथ) आदि 
इनके अतिरिक्त हिन्दी, तेलुगु तथा अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाओं में कई निबंध प्रकाशित हुए हैं।
इनके प्रत्येक निबंध में इनका मानवतावादी दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

1. हिन्दी और तेलुगु : एक तुलनात्मक अध्ययन —

इसमें रेड्डी जी ने दोनों साहित्यों की प्रमुख प्रवृत्तियों तथा प्रमुख साहित्यकारों का अध्ययन प्रस्तुत किया है। इस कृति की उपादेयता के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल डॉ० वी० गोपाल रेड्डी जी ने लिखा है, “यह ग्रंथ तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र का पथ-प्रदर्शक है।”

2. दक्षिण की भाषाएँ और उनका साहित्य — 

इसमें इन्होंने दक्षिण भारत की चारों भाषाओं (तमिल, तेलुगु, कनड़ तथा मलयालम) तथा उनके साहित्यों का इतिहास प्रस्तुत करते हुए उनकी आधुनिक गतिविधियों का सूक्ष्म विवेचन प्रस्तुत किया है। सभी ग्रन्थों में इनकी भाषा-शैली भाव और विषय के सर्वथा अनुकूल बन पड़ी है, जिसमें इनका साहित्यिक व्यक्तित्त्व पूर्ण रूप से मुखरित हुआ है। 

प्रो. रेड्डी की भाषा —

हिन्दीतर प्रदेश के निवासी होते हुए भी प्रो० रेड्डी ने हिन्दी भाषा पर अच्छा अधिकार प्राप्त कर लिया है। इनकी भाषा परिमार्जित तथा सशक्त है और शैली विषय के अनुसार ढल जाती है। भाषा को सम्पन्न बनाने के लिए इन्होंने अपनी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ-साथ उर्दू, फारसी एवं अंग्रेजी भाषा के शब्दों का प्रयोग भी किया है। 

प्रो. रेड्डी की शैली —

इनकी शैली के विवेचनात्मक, गवेषणात्मक, प्रश्नात्मक, आलोचनात्मक आदि रूप दिखायी पड़ते हैं। कठिन- से-कठिन विषय को सरल एवं सुबोध ढंग से प्रस्तुत करना इनकी अपनी विशेषता है। प्रो० रेड्डी से हिन्दी साहित्य को बड़ी आशाएँ रही हैं।

भाषा की समस्याओं पर विद्वानों ने बहुत लिखा है परन्तु ‘भाषा और आधुनिकता’ पर विशेष रूप से नहीं लिखा गया। बिद्वान् लेखक ने वैज्ञानिक दृष्टि से भाषा और आधुनिकता पर विचार किया है। भाषा परिवर्तनशील होती है। 
इसका इतना ही अर्थ है कि भाषा में नये भाव, नये शब्द, नये मुहावरे तथा लोकोक्तियाँ, नयी रीतियाँ सदैव आती रहती हैं। इन सबका प्रयोग ही भाषा को व्यावहारिकता प्रदान करता हुआ भाषा में आधुनिकता लाता है। 
विद्वान् लेखक का मत है कि हमें वैज्ञानिक शब्दावली को ज्यों का त्यों लेना चाहिए। व्यावहारिकता की दृष्टि से प्रो० रेड्डी का यह सुझाव विचारणीय है।

इस पोस्ट में क्या पढ़ा ― 

इस पोस्ट में हमने प्रो. जी. सुंदर रेड्डी के जीवन पर प्रकाश डालने की कोशिश की है । अब अगर आपकी परीक्षा में इनका जीवन से सम्बंधित प्रश्न या इनका जीवन परिचय लिखने को आता है तो आप आसानी से लिख सकते हैं । 
प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी, sundar reddi ka jivan parichay
जीवन परिचय

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