गद्य किसे कहते हैं ? गद्य और पद्य में अन्तर [आसान शब्दों में] – Hindi Raja

विद्यार्थियों आज हम हिन्दी बिषय के एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न पर बात करेंगे | जिसमें हम आपको गद्य के बारे में बतायेंगे |इस पोस्ट को पूरा पढ़कर आप जान पायेंगे की गद्य किसे कहते हैं | आप इस आर्टिकल में गद्य और पद्य के बीच अन्तर भी पढ़ेंगे, तो ध्यान से पढ़िये-



इस परिभाषा को आप अपने परीक्षा में भी लिखकर आ सकते हैं | आपको इस परिभाषा को याद करने में काफी ज्यादा सुविधा होगी क्योकि इसकी भाषा बिल्कुल साधारण है | 

दोस्तों आपसे हिन्दी की परीक्षा में पूछा जा सकता है की, गद्य की परिभाष  लिखो ? तो आपको इस परिभाषा को अपनी उत्तरपुस्तिका में लिखकर अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं |

प्रश्न: गद्य किसे कहते हैं अपने शब्दों में लिखिये ?

उत्तर – (क्या आपको पता है की गद्य लेखन से पहले पद्य लिखने की शुरूवात हो चुकी थी | हिन्दु धर्म से सम्बन्धित लगभग सभी रचनाएं पद्य विधा में ही लिखी हुई है | अब चलिये गद्य की परिभाषा को भी पढ़ लेते हैं |)

छंद, ताल, लय एवं तुकबंदी से मुक्त तथा विचारपूर्ण एवं वाक्यबद्ध रचना को गद्य कहते हैं |

गद्य शब्द गद् धातु में यत प्रत्यय जोड़ने से बना हुआ शब्द है | गद् शब्द का हिन्दी अर्थ बोलना, बतलाना या कहना होता है |ज्यादातर हम जो भी बातचीत आदि करते हैं वो सभी गद्य में ही बोली जाती है | इसमें कोई भी अपनी बात को किसी दूसरे को काफी ज्यादा आसानी से समझा सकता है और समझ भी सकता है | हम सभी अपने विचारों को मस्तिष्क में गद्य के रूप में ही सोचते हैं |

अगर गहनता से देखा जाये तो हम प्रत्यक्ष देख सकते हैं की आधुनिक हिन्दी साहित्य की सबसे अधिक घटनायें गद्य में ही लिखी गयी हैं |

हिंदी गद्य से संबंधित एक यह भी विचारधारा है की दिल्ली और मेरठ के आस-पास(नजदीकी क्षेत्रों में) बोली जाने वाली खड़ी बोली के साहित्यिक रूप को ही हिंदी गद्य के रूप में जाना जाता है |

भाषा विज्ञान की दृष्टि से ब्रजभाषा, खड़ी बोली, कन्नौजी, हरियाणवी, बुंदेलखंडी, अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी इन 8 बोलियों को हिंदी गद्य के अंतर्गत रखा गया है | हिंदी गद्य के प्राचीनतम प्रयोग राजस्थानी एवं ब्रजभाषा में देखने को मिलते हैं |

गद्य किसे कहते हैं, gadya kise kahte hai, gadya kya hai

दोस्तों हमने अभी गद्य के बारे में बात की |हमें आशा है आपको अच्छे से समझ में आ गया होगा | अब अपने अगले महत्वपूर्ण बिषय की ओर बढ़ते हैं, जिसमें हम गद्य और पद्य के बीच अन्तर को समझेंगे और याद भी करेंगे | तो चलिये शुरू करते हैं –

प्रश्न: गद्य और पद्य में अन्तर स्पष्ट कीजिये |

उत्तर – गद्य व पद्य में अन्तर निम्नलिखित है —

गद्यपद्य
गद्य में रचना करने वाला लेखक होता है |पद्य में रचना करने वाले को कवि कहते हैं |
गद्य में रचना अनुच्छेद के रूप में होती है |पद्य में रचना पंक्तियों के रूप में होती है |
गद्य में प्रसांगिक कथायें नहीं होती है |पद्य में प्रसांगिक कथाएं होती हैं |
गद्य में मानवीकरण नहीं होता है |पद्य में मानवीकरण होता है |
गद्य की विधाएं – निबंध कहानी एकांकी आदि |पद्य की विधाएं – छंद, दोहा, सोरठा, चौपाई आदि |

दोस्तों अगर आप हिन्दी में और अधिक पढ़ना चाहते हो तो आप हिन्दी गद्य साहित्य के इतिहास के बारे में पढ़ सकते हैं जो की काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है | आपकी परीक्षा की दृष्टि से इसमें सभी महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरों का समावेश किया गया है |

विद्यार्थियों अगर आपको हमारा यह प्रयास पसंद आया तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर करें | आपका अगर कोई भी सवाल हो तो आप कमेंट में पूछ सकते हैं |
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